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क्षमापना विरो का आभूषण- पूज्य श्री

बडौद से संजय जैन की रिपोर्ट

क्षमापना विरो का आभूषण- पूज्य श्री

बडौद. चातुर्मास अंतर्गत पर्वाधिराज पर्युषण के अंतिम दिवस श्री आनंद चंद्र जैन आराधना भवन बडौद में परम पूज्य साध्वीवर्या ब्राह्मी श्रीजी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से बताया कि वर्षभर में की गयी समस्त भुलों के लिए संवत्सरी महापर्व पर प्रतिक्रमण के पूर्व क्षमा मांग लेना चाहिए. क्षमापना नहीं मांगने से भवों भव तक कर्मों का बंध बना रहता है. जिसने क्षमा मांगी वो आराधक एवं नहीं करता वो विराधक होता है. आप क्षमा मांगते है तो सामने वाले के मन के भाव आपके प्रति अच्छे होगें. जिसने क्षमा मांगी उसकी गति सुधरती है. अभिमान का त्याग कर मन-वचन-काया से माफी मांगना चाहिए, जो क्षमा मांगता है वो जगत पूज्य बन जाता है. क्षमा विरो का आभूषण होता है. जितने भी तीर्थंकर परमात्मा हुवें, सबने अहिंसा के साथ क्षमा को महत्व दिया है.
सभी श्रावको को संवत्सरी प्रतिक्रमण के पूर्व एक दूसरे से क्षमा मांगना श्रावकों का प्रथम कर्तव्य है. ट्रस्टी ललित जै. राजावत ने बताया कि पर्वाधिराज पर्यूषन में अठ्ठाई, तिन उपवास एवं पूर्व से निरंतर सिद्धिवधू कंठाभरण तप के तपस्वियों का वरघोडा निकलेगा.

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